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प्यार का तो नाम ही प्यार है ......Valentine Contest

Posted On: 10 Feb, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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सोचता हूँ की क्या लिखू, लिखू भी या न लिखू.. सबने इतना अच्छा है लिखा, अब इससे अच्छा क्या लिखू..

प्यार पर लोगो ने इतना कुछ लिखा है और इतना अच्छा लिखा है की मै कुछ सोच में था की अब इससे अच्छा और इससे नया क्या लिखू.. पर फिर सोचा, प्यार में नया पुराना क्या होता है, अच्छा बुरा क्या होता है, प्यार तो प्यार होता है..

प्यार का तो नाम ही प्यार है, प्यार का तो काम ही प्यार है,
प्यार तो बस प्यार है, और प्यार के बिना ये सारा जहाँ बेकार है....
प्यार का न तो कोई रूप है और ना ही कोई आकार है,
फिर भी इस जहां में प्यार सम्पूर्ण रूप से साकार है....
लैला को मजनू से प्यार है, तो हीर को भी रांझा से बहुत प्यार है,
कृष्ण को हर गोपी से प्यार है, फिर भी कृष्ण और राधा में अटूट प्यार है....
कहीं प्यार का एक नाम ऐतबार है तो किसी के लिए प्यार चमत्कार है,
प्यार तो सभी का यार है, और प्यार को तो सभी से प्यार है....
माँ के लिए बेटे की शरारत प्यार है, और बेटे के लिए माँ का आँचल प्यार है,
बेटे की उछल-कूद में प्यार है, तो पापा के डांट में भी छुपा प्यार है....
किसी के लिए जीत का नशा प्यार है तो किसी के लिए हार का मजा भी प्यार है.
किसी के लिए देश की खातिर लड़ना प्यार है, तो किसी के लिए देश पे मरना भी प्यार है....
प्यार तो वो हथियार है, जिसके आगे तीर और तलवार भी बेकार है,
प्यार अगर दोस्तों का यार है तो इसे दुस्मानो से भी उतना ही प्यार है....
चिड़िया की चेहचाहट में प्यार है, तो झरने के संगीत में भी प्यार है,
और वहीँ पर है सारी खुशियाँ जहाँ पर बस प्यार ही प्यार है....
कहीं भीड़ में भी दीखता प्यार है, तो कभी सन्नाटे में भी छुपा प्यार है,
पुरूष के क्रोध में भी प्यार है, और नारी का श्रृंगार भी तो प्यार है ....
प्यार का तो नाम ही प्यार है, प्यार का तो काम ही प्यार है,
प्यार तो बस प्यार है, और प्यार के बिना ये सारा जहाँ बेकार है....

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Deepak Sahu के द्वारा
February 12, 2011

प्यार तो बस प्यार है, और प्यार के बिना ये सारा जहाँ बेकार है…. सुंदर पंक्तियाँ प्रस्तुत की हैं आपने ! बधाई! मेरे ब्लॉग “प्रेम की सार्थकता” मे आप सादर आमंत्रित हैं! http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/2011/02/09/valentine-contest/ दीपक साहू

    Nish aik bevkoof के द्वारा
    February 12, 2011

    धन्यवाद साहू भाई, प्रेम तो है ही सुन्दर, कैसे भी बयां करो सुन्दर ही लगता है …

roshni के द्वारा
February 11, 2011

निश जी प्यार का नाम ही प्यार है तो प्यार का काम भी प्यार है प्यार के हर रंग को खूबसूरती से पेश किया अपने सुंदर

    Nish aik bevkoof के द्वारा
    February 12, 2011

    शुक्रिया रौशनी जी,

nishamittal के द्वारा
February 11, 2011

पहली बार आज आपको पढ़ा.बहुत अछे भाव व प्रस्तुति आपकी.कृपया मेरे सुझाव को मान सकते हिओं तो इतनी अच्छी कविता लिख कर अपने नाम का अंतिम शब्द वेवकूफ हटा दें,सकारात्मक उपनाम रखें..

    Nish aik bevkoof के द्वारा
    February 12, 2011

    शुक्रिया आदरणीय निशा जी, आपके सुझाव को मानकर अच्छा नाम रखने की कोशिश करूंगा..

chaatak के द्वारा
February 11, 2011

निश जी, आज पहली बार आपको पढ़ा| आपका लेखन आकर्षक है| रचना आपकी अनुभूतियों की गहराई को सहज व्यक्त करने में सक्षम है| बधाई!

    Nish aik bevkoof के द्वारा
    February 12, 2011

    धन्यवाद चातक भाई, बस जो मन में आता है वाही लिख लेता हूँ..

Bhagwan Babu के द्वारा
February 10, 2011
    Nish aik bevkoof के द्वारा
    February 11, 2011

    शुक्रिया भगवान भाई, बस ऐसे ही एक कोशिश कर के देख रह था, वैसे तो प्यार खुद ही बहुत रंगीन है..

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 10, 2011

बड़े खुबसूरत अंदाज में प्रेम की व्याख्या की है आपने बधाई

    Nish aik bevkoof के द्वारा
    February 10, 2011

    बहुत बहुत शुक्रिया निखिल भाई,


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